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Saturday, 29 October 2016
शिक्षा और शिक्षक का दायित्व
शिक्षा और शिक्षक का दायित्व
आज जब शिक्षा का मतलब महज किताबी ज्ञान और विद्यालयों में सर्वोच्च अंक लाकर नौकरी पाना भर मान लिया गया है। आज हमारे यहां शिक्षक हैं,शिक्षिकाएं हैं, वे छात्रों को निर्धारित पाठयक्रम के अनुसार शिक्षा देते हैं, किन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात जीवन निर्माण का व्यावहारिक शिक्षण आज नहीं हो पाता। आज गुरु-शिष्य, शिक्षक और छात्र का संबंध पहले जैसा नहीं रहा। केवल कुछ अक्षरीय ज्ञान दे देने, एक निश्चित समय तक कक्षा में उपस्थित रहकर कुछ पढ़ा देने के बाद शिक्षक का कार्य समाप्त हो जाता है।
आज शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सम्बन्धों की बहुत बड़ी खाई पैदा हो गई है। यद्यपि इसका कारण आज की सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियां भी हैं, लेकिन हम शिक्षक व्यक्तिगत तौर पर अपनी इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं। जिस तरह अभिभावक बालकों के लिए रोटी-कपड़े, का प्रबंध करके अपनी जिम्मेदारियों से सर्वथा मुक्त नहीं हो सकते, उसी प्रकार हम भी पाठ्यक्रम को पूर्ण क़र उन उत्तरदायित्वों से छुटकारा नहीं पा सकते। शिक्षक के पास जो भी ज्ञान है वह विद्यार्थी के साथ समाज के लिए वितरित करना उसका दायित्व बनता है। बच्चों को पढाई के अलावा उसे सामाजिक जीवन से संबंधित ज्ञान की प्राप्ति करवाना तथा समाज में योगदान के लिए समर्थ बनाना भी शिक्षक का दायित्व है। इसके अलावा शिक्षक के वैयक्तिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, राजनैतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, नैतिक, व्यावसायिक उत्तरदायित्व भी होते है। पढ़ना विद्यार्थी का कार्य है ही लेकिन बच्चे, युवा पीढी तथा समाज में उपयुक्त चीजों की सहायता से आदर्श एवं संस्कारों को निर्मिति करना भी उसी का काम है। "शिक्षक का दायित्व कमरे में बैठ कर बच्चों को पढाना नहीं होता है। उसका दायित्व विद्यार्थियों का विकास करते हुए उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करना होता है।"
"समाज में एक अच्छे शिक्षक की भूमिका अदा करनी हो तो नियमित रूप से आत्मपरीक्षण करते हुए आशावादी वृत्ति को तरोताजा रखने की आवश्यकता है।" शिक्षक के पास बहुत बड़ी शक्ति है उसे इसे समझना चाहिए । यदि प्यार और आत्मीयता के व्यवहार से शिक्षक ने विद्यार्थी वर्ग को अपनी बात मनवाने के लिए तैयार कर लिया तो अपने दायित्वों को निभाना इतना कठिन न होगा। अंत में स्वामी विवेकानंद की वो पंक्तियां जो हमें प्रेरणा देती है , हमेशा अपने मार्ग पर आगे बढ़ने की :
"उठो, जागो और तब तक मत रुको ,जब तक तुम्हे लक्ष्य की प्राप्ति न हो "
पवन जांगड़ा (जे.बी.टी.अध्यापक)